ये एहसान तुम्हारा है
झूम रही है सारी दुनिया जब कि हमारे गीतों पर,
तब कहती हो प्यार हुआ है , क्या एहसान तुम्हारा है !
बीच भंवर में छोड़ दिया था मेरी नाजुक किश्ती को,
आज बना साहिल मैं खुद का अब तुमने दिया सहारा है !
दुःख का दरिया उमड़ रहा था भंवर पड़ा था जब उसमें,
तूफानों मैं उलझ गया था पर अब मिल गया किनारा है !
तुम चले गए अपनी दुनिया में मैं भी तुमको भूल रहा,
आज मगर क्यों ख्वाब में आकर तुमने मुझे पुकारा है !
तुम कहते थे मैं पागल हूँ वो भी मैंने स्वीकार किया,
चाहत ने पागल बना दिया इसमें क्या दोष तुम्हारा है !
तुम मिल जाओ ये माँगा बस तुम न मिले कोई बात नहीं,
याद तुम्हारी हैं काफी उनके के संग जीना यूं ही गवारा है !
तुम आये तो लिखना सीखा तुम चले गए मैं नहीं रुका,
पर तुमने मुझको कवि बनाया ये एहसान तुम्हारा है !
नहीं मिले तुम नहीं मिलोगे इसका कोई दर्द नहीं,
पर सौ बातों की एक बात यही है के अब्बू जाट तुम्हारा है !
09 नवम्बर 2017
23:50 अपराह्न
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