ना मिलनी थी वो ना मिली वो

शाम ढलने को थी और बस सड़क पर सरपट दौड़ती जा रही थी । मैं संगीत में खोया हुआ था कि अचानक से एक जोरदार ब्रेक ने ध्यान भंग किया । मैं एक दम से झुंझुला उठा बस रुक एक दम सुनसान सी जगह पर बने एक छोटे से झोपड़ीनुमा यात्रीप्रतीक्षलय पर रुक चुकी थी ।और देखा की एक सुंदर नवयौवना बस में चढ़ चुकी थी बस में मेरी सीट के पास वाली सीट के अलावा और कोई सीट नहीं थी लिहाजा उसे मेरे पास वाली सीट पर बैठना पड़ा।
यकीन मानिए वो पहली यात्रा थी जब कोई नवयौवना मेरे पास वाली सीट पर बैठी थी ।
पहले मैं थोड़ा असहज था मगर उसने गुफ्तगू का सिलसिला शुरू किया
कहाँ जारहे हैं से लेकर क्या करते हैं हमने एक दुसरे को को सब कुछ बताया मगर कमाल की बात ये थी सफर में करीब 3 घंटे व्यतीत हो चुके थे मगर फिर भी हम एक दुसरे का नाम नहीं जानते थे ।
खैर ऐसा समय ज्यादा नहीं रहता मैंने उसे बताया कि मेरा गंतव्य करीब ही है और अब विदा चाहता हूँ।

तो उसने बातों का सिलसिला कायम रखने और एक राबता कायम करने के लिए मेरा पता और मोबाइल नंबर मांग लिया ।
मैं बड़ा उत्साहित हुआ बैग देखा तो याद आया की मेरी कलम तो बैग में नहीं है खैर कोई बात नहीं मेरी डायरी मेरे पास थी तो मैंने परिचय वाला पेज जिसमे मेरा ओर पर और नंबर इत्यादि की पूर्ण जानकारी थी वो निकाल कर उस मोहतरमा को देदिया और इतने में मेरा गंतव्य आगया तो मैं बस से उतर गया ।
तीन दिन व्यतीत होने पर जब कोई सन्देश नहीं मिला तो अचानक से अपनी डायरी को देखा ।

मगर ये क्या !
अँधेरे में मैं अपने परिचय वाला पेज नहीं शहरों के एसटीडी कोड वाला पेज फाड़ कर दे आया था 😊😊😊😊

13 नवम्बर 2017
02:10 अपराह्न

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