ढपोरशंख
ढपोरशंख :-
एक गुफा में २ व्यक्ति "जनता" और "भक्त" सकून की तलाश में पहुंचे।
वहां २ शंख रखे थे. एक शंख और दूसरा ढपोरशंख और लिखा था यह करामाती शंख हैं। विशेषतायें अलग-२ हैं। इनसे जीवन सुख-समृधि से भरा होगा। विशेषताए खुद शंख से पूँछ लो।
जनता ने शंख उठाया और पूंछा,
"मेरी मदद करोगे. मेरी जिंदगी आसान बनाओगे?
शंख ने बहुत धीरे से जबाब दिया "मुझसे जितना हो सकेगा वो करूंगा"।
जनता- "मुझपर ३ लाख का कर्ज है, खेती का? ख़त्म कर सकते हो?
शंख ने काफी देर बाद जबाब दिया- "२ लाख का कर्जा ख़त्म कर दिया"
जनता- "दुनिया में तेल मंहगा होगा? क्या सस्ता दे पाओगे?"
शंख- "हाँ 144 डालर बैरल होने पर भी 72 में दूंगा।"
जनता- "मेरी बात दुनिया में चीख-चीख कर कह पाओगे?"
शंख- "नहीं, लेकिन सर नहीं झुकने दूंगा और आपकी आराम की चीजे सबसे शांति से मनवा लूँगा"
ढपोरशंख "भक्त" ने उठाया और पूंछा-
"देश पर आतंकवादी हमला कर सैनिको के सर काट रहे हैं? बदले में उनके सर काटोगे?
ढपोरशंख - "हाँ, क्यों नहीं? एक क्या बदले १० सर काटूँगा. 10 गुना काटूँगा"।
भक्त- "विदेशो में कालाधन है, लाकर सभी को 1.5 लाख रु दे पाओगे?"
ढपोरशंख - "हाँ क्यों नहीं 1.5 लाख क्या 10 गुना 15 लाख दूंगा।"
भक्त- "और क्या-क्या करोगे?
ढपोरशंख - "बुलेट ट्रेन चला दूंगा. 100 स्मार्ट सिटी बना दूंगा. जो भी कहोगे 10 गुना कर दूंगा"
दोनों ने अपना अपना शंख लिया और घर चले गए।
"जनता" ने शंख लिया जोर से बजाया. तो शंख से जो माँगा उतना या कम मिल गया।
"भक्त" ने ढपोरशंख लिया जोर से बजाया. शंख 10 गुना जोर से बजा. पर किया कुछ नहीं।
"भक्त" परेशान उसने कुछ दिन इन्तेजार किया।
फिर ढपोरशंख को साफ़ करके बजाया। ढपोरशंख फिर 10 गुना जोर से बजा और कहा यह कर दूंगा, वो कर दूंगा, कुछ इन्तेजार करो. पर किया कुछ नहीं।
धीरे-२ कुछ महीने बीत गए. "भक्त" से सब्र नहीं हुआ. फिर बजाया ढपोरशंख को.
इस बार फिर ढपोरशंख जोर से बोला, यह कर दूंगा, वो कर दूंगा।
"भक्त" ने इस बार पूँछ लिया- "महाराज करोगे कब?"
ढपोरशंख ने जबाब दिया- "मैं करता नहीं हूँ. बस "जुमला" बोलता हूँ. जो मांगोगे उसका 10 गुना देने का वायदा कर देता हूँ ।"
बाकि आप सब समझदार हैं 😉
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