अब तू कहाँ और हम कहाँ
न करीब आ न गले मिला, ये आशिकी बेकश किया
तेरी जाँ नवाजी देख लीअब तू कहाँ और हम कहाँ
कोई जुस्तजू करना भी क्या, सब गुम हैं अपने आप में
सब हैं पुरानी दास्ताँ बिखरा यहाँ बिखरा वहां
लम्हा दो लम्हा है लिया, कुछ अश्क खुद का पी लिया
कोई संगदिल कोई तंग दिल बेदार भटके ह कहाँ
उजड़ा है अब जो बसा कभी , एक बगवां एक बहार था
आएंगे क्या दिन लौट के पूछती है वादे सबा
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