कब्ज
तंगी का रोना रो कर ,मजदूरों के नेता बन जाते ।
नारी शक्ति का गाना गाकर, कन्याओं पर लठ्ठ बजाते ।
गाय को मैया मैया कह कर ,मजलूमों पर जुल्म ढहाते ।
झूठ मूठ के वादे करके , जनता को तुम मुर्ख बनाते ।
अपने मुँह मियां मिठ्ठू बन कर 56 इंच का ढोल बजाते ।
हिन्दू मुस्लिम राग अलाप के भाईचारे में आग लगाते ।
रामराज्य का नाम चुरा कर राम के नाम को भी झुठलाते ।
लालकिले से झूठ बोल कर अपने ही मन में इठलाते ।
गरीबों के नेता बनते तुम रोज नए कपडे सिलवाते।
महिला सुरक्षा का वादा करके अपनों से लड़की छिड़वाते ।
रोज नया बहाना देकर #अब्बू_जाट से गाली खाते 😂😂
एक भूखे नंगे किसान की बद्दुआ भी सुन लो ......
#कब्जी हो जाये उनको जो छप्पन भोग उड़ाते ।
लेखक- अब्बू जाट
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