आधुनिक भारत और किसान

भारत कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था और ग्रामीण संस्कृति वाला देश है लेकिन आजादी के 70 साल बाद भी दोनों उपेक्षा का दर्द अपने सीने लिये बैठे हैं।
             आज भी किसान अपनी फसलों के पर्याप्त मुल्य और अधिकारों की मांग के लिये सडकों पर गोली खा रहा है जो विकसित भारत की कल्पना करनेवाले नीति निर्माताओं के लिये एक चुनौती है।
            मध्यप्रदेश मे किसानों पर की गयीं बर्बरता भारत को विश्वगुरु बनाने का स्वप्न दिखाने वालो के मुह पर एक कालिख के समान हैं।
            भारत की बिकाऊ मीडिया जो राजनीति गलियारों की दासी बन चुकी हैं देश के किसी भी मूलभूत मुद्दे को सरकार बनाम विपक्ष बना कर उस की आवाज को बडी ही सफाई से दबा देती हैं।
    दोस्तों क्या राजनीति लोग और पुजीपति लोग भारतीय शासन और प्रशासनिक ढांचे की व्यवस्था के आधार पर किसान-मजदूर गरीब और मध्यवर्गीय लोगों का शोषण नही  कर रहे हैं।

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